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मोदी सरकार पर पिता-पुत्र में तकरार के बीच आए चिदंबरम- जाने देश की अर्थव्यवस्था का ताजा हाल

नई दिल्ली: बीते दिन बुधवार को केंद्र की मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला करते हुए वाजपेयी सरकार के दौरान मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने मौजूदा वित्त मंत्री पर गंभीर सवाल खड़ा किया, जिसके जवाब में यशवंत सिन्हा के बेटे और मोदी सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा ने एक लेख के हवाले से दिया है। जयंत ने यह लेख एक अखबार के लिए लिखा है, जिसपर यूपीए सरकार के दौरान मंत्री रहे पी चिदंबरम सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल जयंत के लेख को लेकर चिदंबरम ने एक के बाद एक ट्वीट करते हुए जोरदार हमला बोला है।  उन्होंने कहा कि टीओआई अखबाप में जयंत का लेख PIB प्रेस रिलीज की तरह है। उन्हें यह पता होना चाहिए कि प्रशासनिक बदलाव स्ट्रक्चरल रिफॉर्म नहीं हैं। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि, 'अगर जयंत सिन्हा सही हैं तो जीडीपी में पिछले 5 तिमाहियों में कमी क्यों आ रही है?'

चिदंबरम आगे पूछा हैं कि अगर जयंत सही हैं तो निजी निवेश में कमी क्यों आ रही है। इंडस्ट्री की क्रेडिट ग्रोथ क्यों नेगेटिव है। बिजली की मांग में कमी क्यों आई है?' आपको बता दें कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था का 'कबाड़ा' कर दिया है। यशवंत सिन्हा के इस बयान को लेकर अब पित-पुत्र आमने सामने दिख रहे हैं। दरअसल यशवंत सिन्हा के इन आरोपो का जवाब उनके पुत्र और मोदी सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा ने दिया है।

मोदी सरकार पर सवान खड़े वाले पिता यशवंत सिन्हा को जवाब देते हुए जयंत सिन्हा कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में कई सारे लेख हालिया दिनों में लिखे गए हैं, लेकिन वे सब छोटे तथ्यों पर आधारित हैं। इसमें फंडामेंटल स्ट्रक्चरल रिफॉर्म से दूरी बनाई गई है। अर्थव्यवस्था में इससे सुधार आ रहा है। सरकार ने कई सारे ऐसे सुधार किए हैं, जिसका फायदा आने वाले दिनों में लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया के लिए ढांचागत बदलाव जरूरी है।

नागर विमानन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने अपने लेख में कहा कि, 'जीएसटी, नोटबंदी और डिजिटल पेमेंट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजिंग कदम है। अभी तक टैक्स नहीं चुका रहे सेक्टर को टैक्स की श्रेणी में लाया जा रहा है। लंबी अवधि में टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा और राज्यों के लिए ज्यादा संसाधन उपलब्ध होंगे। अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और जीडीपी दर भी बढ़ेगी।

उन्होंने आगे लिखा कि सभी मंत्रालयों में नीतियां अब नियमों के आधार पर ही बन रही हैं। प्राकृतिक संसाधनों, जैसे कोयला, स्पेक्ट्रम और उड़ान का पारदर्शी तरीके से ऑक्शन किया जा रहा है। दीवाला कानून से फंसी पूंजी का जल्द निपटारा किया जा सकेगा। इससे बैंकिंग सेक्टर को लाभ होगा और NPA में कमी आएगी। सिन्हा ने लिखा कि भारत 2018 तक 100 फीसदी तक गांवों में बिजली पहुंचाने के लक्ष्य के करीब पहुंच जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें रेकॉर्ड 133 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से बनाई जा रही हैं। यह 2014 में 69 किलोमीटर प्रतिदिन की तुलना में दोगुनी है। अफॉर्डबल मकानों के निर्माण के लिए मंजूरी दी जा रही है। यह 2004-14 में 13.8 करोड़ की तुलना में एनडीए सरकार में बढ़कर 17.7 करोड़ पहुंच चुका है। मंत्री के अनुसार हवाई कनेक्टिविटी में नाटकीय बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2014 में जहां 10 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की थी, वहीं 2017 में 16 करोड़ यात्रियों ने हवाई यात्रा की है।

गौरतलब हो कि इससे पहले नोटबंदी, जीएसटी जैसे फैसलों के बाद चरमराती अर्थव्यवस्था को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि 'वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था का जो 'कबाड़ा' किया है, उस पर अगर मैं अब भी चुप रहा तो राष्ट्रीय कर्तव्य निभाने में विफल रहूंगा। मुझे यह भी मालूम है कि जो मैं कहने जा रहा हूं बीजेपी के ज्यादातर लोगों की यही राय है पर वे डर के कारण बोल नहीं पा रहे हैं।'  

बता दें कि यशवंत सिन्हा वाजपेयी सरकार के दौरान मंत्री थे। सिन्हा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, 'प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने गरीबी को काफी करीब से देखा है। ऐसा लगता है कि उनके वित्त मंत्री ओवर-टाइम काम कर रहे हैं जिससे वह सभी भारतीयों को गरीबी को काफी नजदीक से दिखा सकें।'

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