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पीएम मोदी के शासनकाल में हुआ करोड़पतियों की संख्याओं में इजाफा, 2.70 लाख से बढ़कर...

नई दिल्ली : पीएम मोदी जिनका चुनावी नारा था, ‘सबका साथ, सबका विकास’, आज कहीं न कहीं उन्हीं के बनाए नीतियों के भेंट चढ़ गई। जिस कदर देश में गरीबी और बेरोजगारी की संख्या में लगातार वृद्धि हो रहीं हैं, उसी प्रकार हमारे देश में करोड़पतियों के संख्याओं में वृद्धि हो रही है। आपको बता दें कि पहले हमारे देश में करोड़पतियों की संख्या 2.70 ( 2016-17 तक) लाख थी, जो बढकर 2018 में 3.43 लाख हुई। रिपोर्ट की माने तो इस साल करोड़पतियों की सूची में 7,300 नए लोगों का प्रवेश हुआ है।

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जहां रही संपति की बात तो इन सभी कुलपतियों के पास सामूहिक रूप से 6 ट्रिलियन डॉलर यानी 441 लाख करोड़ रूपए की धनराशि है। वित्तीय सेवा कंपनी क्रेडिट सुइस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत सबसे अधिक महिला अरबपतियों (एक अरब डॉलर यानी 73.5 अरब रुपये से ज्यादा संपत्ति वाली अमीर महिलाओं) वाले देशों में शुमार है। क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट के मुताबिक, '2018 के मध्य तक भारत में कुल 3 लाख 43 हजार करोड़पति थे। पिछले एक साल में इनकी तादाद में 7,300 का इजाफा हुआ है।' क्रेडिट सुइस की 2018 ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में नए बने करोड़पतियों में से 3,400 के पास 5-5 करोड़ डॉलर यानी 368-368 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है, जबकि 1500 के पास 10-10 करोड़ डॉलर यानी करीब 736-736 करोड़ रुपये की दौलत है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 तक भारत में करोड़पतियों की संख्या और गरीबी-अमीरी का फर्क बढ़ेगा। उस समय तक के बीच असमानता 53 प्रतिशत से ऊपर बढ़ने की उम्मीद है। उस समय तक देश में करोड़पतियों की तादाद 5,26,000 होगी, जो 8,800 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक होंगे। अब आप यह समझ सकते है कि पीएम मोदी ने रोजगार के लिए युवाओं को पकौड़ें बेचने की सलाह क्यूं दी थी, जिससे आप सिर्फ पकौड़े ही तौलते रह जाएं और दौलतमंद और दौलतमंद हो जाएं।

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जिस प्रकार हमारे देश में दौलतमंद लोगों की संख्याओं में इजाफा हो रहा हैं उससे ये कहना मुश्किल नहीं हैं कि एक बार फिर गरीब एक जून की रोटी को तरसेंगे। अगर अब भी सरकार या जनता सचेत नहीं हुई तो आने वाले समय में गरीब और धनी वर्ग के बीच की खाईं इतनी बड़ी हो जाएगी, जिसे पाटना काफी मुश्किल हो जाएगी।

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