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बैंकों के विलय पर संकट में सरकार, सता रहा है बेरोजगारी का डर

नोएडा : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक झटके में बैंकों के विलय की घोषणा की, जिसके बाद अब देश में बैंकों की संख्या घटकर 12 रह गई है। विलय को लेकर वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि, बैंकों के विलय का मकसद देश में वैश्विक स्तर के मजबूत बैंकों का निर्माण करना है। लेकिन सरकार के इस फैसले से बैंक कर्मचारियों को बेरोजगारी का डर सताने लगा है। कर्मचारी का कहा है कि ये फैसला उनकी समझ से परे हैं, सरकार के इस फैसले के पीछे कोई तर्क नहीं दिखाई देता।

वहीं सरकार के इस फैसले को लेकर विभिन्न बैंकों के यूनियन के पदाधिकारियों ने बैठक की, जिसमें ऑल इंडिया बैंक एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए है। इतना ही नहीं इनका कहना है कि, बैंकों के विलय का निर्णय राजनीतिक निर्णय की तरह लिया गया, वित्त मंत्री के हिसाब से माना जाए तो उनके राजनीति और बैंकों के विलय के निर्णय में कोई अंतर ही नहीं।

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की। इस विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकों के विलय का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत बैंकों का निर्माण करना है, ताकि देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जा सके।

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