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पूर्व RBI गवर्नर राजन ने वर्तमान सरकार पर फोड़ा, देश की आर्थिक धीमी रफ्तार का ठीकरा, कहा घातक...

नई दिल्ली : पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने एक बार फिर देश की आर्थिक धीमी रफ्तार का ठीकरा वर्तमान सरकार पर फोड़ा हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने ऐसे समय में दो घातक निर्णय लिये जिस समय हमारे देश का आर्थिक ग्रोथ रफ्तार पकड़ रहीं थी। नोटबंदी और जीएसटी ने हमारे देश की आर्थिक वृद्धि की कमर तोड़ दी। इन निर्णयों के फलस्वरूप हमारा देश कई वर्ष पीछे चल गया। राजन ने पीएमओ की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में बहुत सारे निर्णयों में पीएमओ का दखल भी तमाम दिक्कतों में से एक है। भाषा के अनुसार राजन ने बर्कले में शुक्रवार को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कहा कि नोटबंदी और जीएसटी इन दो मुद्दों से प्रभावित होने से पहले 2012 से 2016 के बीच चार साल के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि काफी तेज रही। भारत के भविष्य पर आयोजित द्वितीय भट्टाचार्य व्याख्यान में राजन ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के दो लगातार झटकों ने देश की आर्थिक वृद्धि पर गंभीर असर डाला। देश की वृद्धि दर ऐसे समय में गिरने लग गई जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर गति पकड़ रही थी। 

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राजन ने कहा कि 25 साल तक सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर बेहद मजबूत वृद्धि है लेकिन कुछ मायनों में यह भारत के लिये वृद्धि की नई सामान्य दर बन चुकी है जो कि पहले साढ़े तीन प्रतिशत हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि सच यह है कि जिस तरह के लोग श्रम बाजार से जुड़ रहे हैं, उनके लिये सात प्रतिशत पर्याप्त नहीं है। हमें अधिक रोजगार सृजित करने की जरूरत है। हम इस स्तर पर संतुष्ट नहीं हो सकते हैं। राजन ने वैश्विक वृद्धि के प्रति भारत के संवेदनशील होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि भारत अब काफी खुली अर्थव्यवस्था है। यदि विश्व वृद्धि करता है तो भारत भी वृद्धि करता है। उन्होंने कहा कि 2017 में यह हुआ कि विश्व की वृद्धि के गति पकड़ने के बाद भी भारत की रफ्तार सुस्त पड़ी। इससे पता चलता है कि इन झटकों (नोटबंदी और जीएसटी) वास्तव में गहरे झटके थे। इन झटकों के कारण हमें ठिठकना पड़ा।

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राजन ने कहा कि देश के सामने अभी तीन दिक्कतें हैं। पहली दिक्कत उबड़-खाबड़ बुनियादी संरचना है। उन्होंने कहा कि निर्माण वह उद्योग है जो अर्थव्यवस्था को शुरुआती चरण में चलाता है। उसके बाद बुनियादी संरचना से वृद्धि का सृजन होता है। उन्होंने कहा कि दूसरा अल्पकालिक लक्ष्य बिजली क्षेत्र की स्थिति को बेहतर बनाना हो सकता है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि सालाना उत्पन्न बिजली उनके पास पहुंचे जिन्हें इसकी जरूरत है। तीसरा मुद्दा बैंकों के कर्ज खातों को साफ सुथरा बनाना है। राजन ने कहा कि भारत में समस्या का एक हिस्सा यह भी है कि वहां राजनीतिक निर्णय लेने की व्यवस्था हद से अधिक केन्द्रीकृत है। राजन ने कहा कि भारत केंद्र से काम नहीं कर सकता है। भारत तब काम करता है जब कई लोग बोझ उठा रहे हों। आज के समय में केंद्र सरकार बेहद केंद्रीकृत है। उन्होंने कहा, इसका एक उदाहरण है कि बहुत सारे निर्णय के लिये प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति आवश्यक है। इस संबंध में राजन ने सरदार पटेल की मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का जिक्र करते हुए बड़ी परियोजनाओं में प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति की जरूरत की ओर ध्यान दिलाया।

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