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लग सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग, FM का राहत से इंकार!

नई दिल्ली: देशभर में डीजल पेट्रोल की बढ़ी कीमतों में राहत की आस लगाए बैठी जनता को बड़ा झटका लग सकता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ी तेल की कीमतों के बाद डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी आई है। ऐसे में डीजल-पेट्रोल जैसे पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की सम्भावना न के बराबर बतायी जा रही है, जिससे तेल की कीमतों में फौरी राहत नहीं मिलती दिख रही है।

बतादें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारत में भी इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। दिल्ली में मुंबई में पेट्रोल 70-80 रुपये प्रति लेटर बना हुआ है। कच्चे तेल कीमतों में वृद्धि के कारण देश में तेल की कीमतें आसमान छू रहीं हैं। ऐसे में राहत की आस लगाये बैठी देश की जनता को बड़ा झटका लगता दिखा रहा है। एक ओर विदेशी बाजार में तेल की कीमतें गिरने का नाम नहीं ले रहीं हैं। वहीँ देश के वित्त मंत्री ने संकेत दिए हैं कि अभी फिलहाल डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाना संभव नहीं है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि राज्य पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस, रियल इस्टेट पहले जीएसटी के दायरे में लाए जा सकते हैं।

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इनपर बातचीत की संभावना है। वहीँ डीजल पेट्रोल पर अभी जनता को कि राहत नहीं मिलती दिख रही है। भारत में तेल की कीमतों में बढ़ने के पीछे कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होता है, तो इससे राज्यों का राजस्व भी बढ़ता है। राज्यों के राजस्व की एक बड़ी रकम पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैट से आती है। इसके साथ ही कम वैट लगाने वाले राज्य की सरकारें अपने राजनीतिक लाभ को देखते हुए पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर सहम‍त नहीं हैं।

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ऐसे में राज्य सरकार डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं हैं। जिससे आम आदमी को राहत मिलती नहीं दिख रही है। साथ ही बुरी खबर यह भी है कि आगामी कुछ समय में अगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों इजाफा होता है तो भारत में भी डीजल-पेट्रोल की कीमतों में आग लग सकती है।

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