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ओला-उबर की मुश्किलें बढ़ी- 91,000 करोड़ वसूलने की मांग...

नई दिल्ली: मनमाने ढंग से किराया वसूल करने के मामले को लेकर एप आधारित कैब की सुविधा देने वाली कंपनी ओला और उबर की मुश्किलें अब और भी बढ़ती दिख रही है। मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली की एक अदालत ने दोनों कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। मामले की अलगी सुनवाई पर अदालत ने कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधियों को भी पेश होने का निर्देश दिया है।

अदालत का यह फैसला उस याचिका के सुनवाई के बाद आया जिसमें एक गैर सरकारी संस्था न्यायभूमि के सचिव राकेश अग्रवाल ने कंपियों पर आरोप लगाए थे। किराया संबंधित नियमों के उलंघन का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने ओला, उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड का संचालन करने वाली एएनआई टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और टैक्सी फॉर श्योर का संचालन करने वाली कंपनी सेरेंडिपिटी इंफोलैब प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।

मामले पर सुनवाई के दौरान अदाल ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि इन कंपनियों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192 ए का उल्लंघन किया है। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतित हो रहा है कि कंपनी ने 20 जून, 2013 को अधिसूचित मोटर वाहन अधिनियम और सिटी टैक्सी स्कीम का उल्लंघन करते हुए अधिक किराया वसूल किया है।

आपको बता दें कि एनजीओ की ओर से कथित तौर पर पर किराये में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए इन कंपनियों से 91,000 करोड़ रुपये वसूल करने की भी मांग की है। तो वहीं याचिका में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66  और 192 ए का उल्लंघन करने का भी आरोप लगया गया है, इसके साथ-साथ मामले में मुकदमा दर्ज कराने की भी मांग की गई है।

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