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फिच ने सरकार को बताया, आपका विकास यहां रुका है...?

नई दिल्ली: गुरुवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपनी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया है। जहाँ एक ओर बजट को लेकर आम जनता में निराशा है वहीं अब क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग ने भी सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। चौतरफा दवाब में घिरी मोदी सरकार पर फिच ने कहा है कि कर्ज के कारण भारत की रेटिंग में सुधार रुक सा गया है।

बतादें कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग ने मोदी सरकार की ऐसे समय पर परेशानी बढ़ाई है जब सरकार आम बजट पेश कर खुद की पीठ थपथपा रही है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की रेटिंग को लेकर टिप्पणी के बाद सेंसेक्स धडाम से नीची आ गिरा। गुरुवार को सरकार ने आम बजट में कई लोक लुभावन योजनाओं सहित आर्थिक जरूरतों व सामाजिक बेहतरी के लिए कई नीतिगत कदमों की घोषणा की है।

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जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं, किसान-कृषि और गाँव का विकास अहम् है, लेकिन सरकार के लोक लुभावन बजट पर जहाँ विपक्ष सवाल उठा रहा है वहीँ अब रेटिंग एजेंसी फिच के भारत में निदेशक थॉमस रूक्माकर ने रेटिंग में आई रुकावट को लेकर कर्ज को जिम्मेदार बताया है, रुक्माकर ने कहा कि सरकार की कमजोर वित्तीय स्थिति ने भारत की स्वायत्त रेटिंग में सुधार में रुकावट डाला है। जहाँ सरकार पर एक ओर जीडीपी बरकरार रखने के साथ साथ किसान, स्वास्थ्य सेवाओं, कर्ज आदि से भी निजात पाना अहम् है।

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रूक्माकर ने कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के तीन प्रतिशत तक सीमित रखने के लक्ष्य को 2020-21 तक के लिए टाल दिया है जो इसके कार्यकाल से भी आगे है। सरकार द्वारा शुरू की गयी कई ज्यादातर योजनायें लम्बी अवधि की है जिनकों धरातल पर आने में सालों लग जायेंगे, वहीँ साल 2019 में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में योजनाओं का कितना और क्या लाभ मिलता है यह समय ही बताएगा। 

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