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आसमान से सीधे जमीन पर गिरी जेट जेट एयरवेज!

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के सियासी महासमर में सत्ता और विपक्ष सभी के लिए रोजगार और तरक्की का मसला सबसे अहम मुद्दों में से एक हैं। इस क्रम में सत्ता और विपक्ष दोनों बड़े स्चर पर रोजगार श्रृजन के दावे कर रही है। लेकिन हकीकीत का अंदाजा लगाने के लिए इस पूरे मामले को विस्तार से समझने का प्रयास करे।

दरअसल, बीते कई दिनों से मदद के लिए फड़फड़ाती विमानन कंपनी जेट एयरवेज ने आखिरकार दम तोड़ दिया। बुधवार रात सवा दस बजे जेट एयरवेज ने श्री गुरु रामदास अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट राजासांसी से मुंबई के लिए आखिरी उड़ान भरी, जिसमें 91 यात्री सवार थे।

इसके साथ ही कंपनी ने ऐलान कर दिया कि गुरुवार से सभी उड़ानें अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। विमान कंपनी के बंद होने से करीब 20 हजार लोग सड़क पर आ गए हैं, लेकिन सत्ता या विपक्ष सभी इस मसले से दूरी बनाये हुए हैं। आपको बता दें कि कर्ज के बोझ तले दबी कंपनी को भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले बैंकों के कर्जदाता समूह ने 400 करोड़ रुपये की आपात वित्तीय मदद देने से इन्कार कर दिया, जिसके कारण कंपनी ठप पड़ गई।

मौजूदा समय में कंपनी की हालात की बात करें तो कंपनी पर 8,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि कर्मचारियों को तीन महीने से अधिक का वेतन भी नहीं मिला है। विमान पट्टेदारों का बकाया और रद हुई उड़ानों के एवज में यात्रियों का करोड़ों रुपये का रिफंड भी बकाया भुगतान करना है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बीच जेट एयरवेज के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का फैसला किया।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जेट की उड़ाने बंद होने का असर दूसरी एयरलाइंस कंपनियों पर भी पड़ने लगा है। जेट के बंद होने से एक तरफ तो उनकी बुकिंग अचानक बढ़ गई है तो दूसरी तरफ बढ़ती मांग की भरपाई के लिए कंपनियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। इन विमानन कंपनियों ने पायलटों की कमी से उबरने के लिए जेट के पायलटों को ऑफर देना शुरू कर दिया है।

हालांकि तीन महीने से अधिक समय से वेतन नहीं मिलने के बावजूद जेट के एक हजार से अधिक पायलटों में से अधिकांश लोग कंपनी छोड़ने को तैयार नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह है कि अन्य कंपनियां जेट के पायलटों को उनके वेतन से 30 प्रतिशकत कम सैलरी ऑफर कर रहे हैं। जिसके कारण कंपनी बंद होने के बाद भी जेट के कर्मचारी कंपनी के साथ रहकर संघर्ष करने को तैयार है।

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