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लालू परिवार को बदनाम करने पर तुले हैं तेजप्रताप ?

पटना: बिहार में महागठबंधन की सरकार के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रहे तेजप्रताप यादव को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। इससे पहले आपको बता दें कि तेजप्रताप यादव आरजेडी प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे हैं। लालू परिवार के साथ घोटालों और विवादों का पुराना नाता रहा है। जिसका एक छोटा सा उदाहरण हैं चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे लालू यादव। हालांकि ये और बात है कि लालू यादव कानून के आंख में धूल झोंकर कोर्ट द्वरा सजाए सुनाएं जाने के बाद भी जेल के बाहर आते जाते रहते हैं।

इस बीच अब लालू यादव के बेटे तेजप्रताप यादव से जुड़ा यह विवाद सरकारी जमीन पर कब्जा करने को लेकर है। बता दें चारा घोटाले में लालू को जेल होने के अलावा भी कई तरह के घोटाले में लालू परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम सामने आ चुके हैं, जिसकी जांच फिलहाल जारी है। ऐसे में अगर आप तेज प्रताप के इस नए मामले की बात करते हैं तो मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दावा किया जा रहा है कि तेज प्रताप ने सरकारी जमीन पर मंदिर का निर्माण कराया है।

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सिर्फ निर्माण ही नहीं कराया बल्कि उसपर एक शिलान्यास पट लगवा कर अपना और अपने भाई तेजस्वी के सथ मां राबड़ी देवी का नाम भी लिखावा दिया, हलांकि अब खबर है कि विवादों के बाद इस शिलान्यास पट को रंग दिया गया है, ताकि इनके नाम सामने न आ सके। रिपोर्ट के अनुसरा दावा किया जाता है कि मंदिर भवन निर्माण विभाग की जमीन पर बनवाया गया है।

खबरों के अनुसार, बिहार में महागठबंधन की सरकार के दौरान स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर तेजप्रताप यादव को पटना के 3, देशरत्न मार्ग पर सरकारी बंगला आवंटित किया गया है। इस बंगले पर मंत्री पद जाने के बाद भी तेजप्रताप का कब्जा है, हालांकि वह यह अपने परिवार के साथ रहते नहीं हैं। बताया जाता है कि वह इस बंगले का इस्तेमाल अपने छात्र संगठन DSS की मीटिंग्स लेने के लिए करते थे।

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लेकिन यहां चौंकाने वाली बात है कि तेजप्रताप इस बंगले में आने जाने के लिए मेन गेट का इस्तेमाल न करके बंगले के पीछे एक नया गेट बनावाया और यहां से निकल रही एक पतली सड़क से आने जाने का काम करते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए ही तेजप्रताप यादव ने बंगले के पीछे की इस सड़क पर चारदीवारी बनवाना शुरू किया जो मंत्री पद जाने के बाद भी जारी रहा।

दावा किया जाता है कि इस दौरान तेजप्रताप ने सड़क के साथ-साथ मंदिन निर्माण का कार्य भी करा रहे थे। हाला के दिनों में मंदिर लगभह बन कर तैरायर है, लेकिन इसके सुंदरीकरण का काम जारी है। बताया जाता है कि मंदिर में ठंडक महसूस हो इसलिए यहां दो-दो एसी लगावाए गए है, वहीं मंदिर की सुरक्षा के नाम पर यहां दो गार्ड्स भी तैनात किए गए हैं।

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हालांकि यहां सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि राज्य की सरकार इतना सब कुछ होने के बाद चुप्पी साधे बैठी है। और जब मीडिया ने इस संबंध में सरकार के संबंधिकत मंत्री से जानने की कोशिश की तो मंत्री अपनी जिम्मेदारियों से बचते दिखे। जबकि तेजप्रताप की पार्टी आरजेडी नेता का कहना है कि अगर ये सब गैरकानूनी तरीके से हो रहा है तो सरकार इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती। गौर हो कि क्योंकि मामले मंदिर से जुड़ा है शायद इसलिए सरकार इससे कन्नी काट रही है।

लेकिन यहां बड़ा सवाल है कि क्या किसी भी जगह पर मंदिर बनाने देने के बाद सरकार कार्रवाई नहीं करेगी और मंदिर बनाने वाला मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र को अपनी बपौती बना लेगा?

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