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सरकार पानी बचाना चाहती है, लेकिन यहां तो पानी तबाही मचा रहा है

नोएडा: आज हम बात करेंगे उसी जल संकट की जिससे न सिर्फ भारत बल्कि कुछ एक देशों को छोड़, ताकतवर से ताकतवर और दुर्बल से दुर्बल देश जूझ रही है। उसी जल संकट की बात कर रहे हैं जिससे निपटने के लिए मोदी सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय बनाने का फैसला किया और दूसरी बार सत्ता में आते ही बड़े-बड़े सपने दिखाने लगी, लेकिन इन दिनों हिंदुस्तान में एक अलग ही किस्म का जल संकट बना है, जिसके जद में 7 राज्य, 12 जिले और करीब 60 लाख से भी अधिक लोग आ चुके हैं। पढ़िए जल संकट वाली हिला देने वाली रिपोर्ट।

पता नहीं इंद्रजीत सिंह तुलसी को क्या भाया जो उन्होंने विज्ञान को गाने में बदल डाला, तुलसी ने 1972 में ही गाना बना बना दिया, लेकिन अगर वे पानी की ये तस्वीरें देख लेते तो शायद गाने के बोल बदल देते। जून के महीने में हिंदुस्तान में आसमान से आग बरस रही थी, लोग पानी को तरस रहे थे, पानी के कारण बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था, लोग मर रहे थे, ऐसे में लोगों की निगाहे सरकार की जलशक्ति मंत्रालय की ओर टीकी थी, कि कुछ तो शक्ति दिखाए हुजुर। वहीं पीएम ने भी पानी बचाने के कर्ई उपाये बताए थे।

लेकिन जुलाई के महीने में पानी ही पानी, चहुओर पानी, सात राज्यों का अधिकांश हिस्सा पानी में, लोगों का घर पानी में, लोग पानी में, उनके जानवर पानी में खेल-खलिहाल पानी में मानो अब बस पानी ही पानी। जनता के सेवक सरकार कुदरत का कहरा बताकर अगले साल का जवाब तैयार करने में जुट जाती है और जनता-जनार्दन साल दर साल मरती जा रही है। जल संकट की तबाही असम और बिहार समेत देश के सात राज्यों में दिख रही है, लेकिन बर्बादी सबसे अधिक बिहार में और बिहार का सितामढ़ी तो बस पानी में बहने से बच गया, बाकी पूरा जलमग्न। घर बाजार स्कूल सब पानी में, दूर दूर तक पानी ही पानी। चंद रोज पहले तक यहां सरकार की बनाई गई चमचमाती हुई सड़क थी, जिसे नेशनल हाइवे कहते थे, लेकिन भूतकाल में बनी उस सड़क का वर्तमान सैलाब में है। तो यहां आंखों के समने सड़क बह गई। हाइवे पर पानी की धार करंट मार रहा है। ऐसा लगा रहा है जैसे खड़े हुए तो बाढ़ बहा ले जाएगा।

ये हाइवे सितामढ़ी को दरंभगा, मधुबनी से जोड़ता है, और ये इलाका बाजपट्टी है, जहां का बांध टूट गया, देखते ही देखते पूरा इलाका जनमग्नम हो गया। सड़क से उतर कर गांव में चलिए तो लोगों का घर बार पूरी तरह से डूब चुका है, लोग रात और दिन छत पर काट रहे हैं और जिनके पास छत भी नहीं है वे पानी में डूब कर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

अकेले बिहार में बाढ़ के कारण 25 लोगों की मौत हो गई है, सत्ता के इंजिनियरों की नीयत को लहरों में खोता खा रही है, लेकिन 14 हाथ-पर हाथ धरे बैठे रहेने वाली सीएम साहब सदन में अपनी छाती ठोकते नहीं थकते। कागज के पन्ने में सरकारी तंत्र का पूरा लेखा-जोखा लेकर पहुंचते हैं, और बचाव कार्यों पर सरकारी तैयारियों की ऐसी जानकारी देते हैं मानों बिहार में बाढ़ से किसी को कुछ परेशानी ही नहीं। लेकिन सीएम एक रटी हुई भाषा, किसी परम सत्य की तरह दोहरा रहे थे, हर साल दोहराते हैं, 14 सालों से दोहराते रहें हैं, लगातार तीन टर्म में नीतीश कुमार का विकास आपके सामने है।

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