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प्रिंसिपल और टीचर्स ने ले ली छात्रा की जान, पटना में भारी बवाला!

पटना: दिल्ली की सत्ता पर बैठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हो या फिर बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार की सरकार, महिला सुरक्षा का ढिंढोरा पीटते किसी की जुबान नहीं थकती। लेकिन देश और प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा की हकीकत जगजाहिर है। राह चलती बहू-बेटियों के साथ लगातार घट रही आपराधिक घटनाओं के बीच अब सरकारी शिक्षण संस्थानों में भी महिलाओं और बेटियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

जिसका एक ताजा उदाहरण बिहार के आईजीआईएमएस जैसे उत्कृष्ट संस्थान में देखने को मिला। यहां नर्सिंग की छात्रा की रहस्यमई मौत के मामले ने कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा की मौत के मामले में संस्थान प्रबंधक और यहां तक की सरकार की भूमिका भी संदिग्ध दिख रही है। संस्थान में पढ़ रही अन्य छात्राओं का आरोप हैं कि उनकी सहपाठी की मौत का जिम्मेदार संस्थान प्रबंधक ही हैं।

नर्सिंग छात्राओं का आरोप है कि उन्हें प्रिसंपल और अन्य शिक्षक लागातार प्रताड़ित करते हैं। जिसके कारण ही छात्रा की मौत हुई है। आपको बता दें कि आईजीआईएमएस में सोमवार को खुशबू नाम की एक शादीशुदा छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिसकी मौत देर रात इलाज के दौरान हो गई। छात्रा की मौत को बाद अन्य आक्रोशित छात्राओं ने मंगलवार को प्राचार्य के खिलाफ जमकर हगामा किया।

प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए छात्राएं धरने पर बैठ गईं और मृतक छात्रा का पोस्टमार्टम भी रोक दिया। जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग कर उन्हें वहां से हटाया, इस दौरान कुछ छात्राएं चोटिल भी हो गई, जिसके कारण छात्राओं का गुस्सा और भी बढ़ गया। इस पूरे बवाल में करीब 15 छात्र-छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया और थाने लेकर गई। जिन्हें देर शाम रिहा कर दिया गया।

हालांकि यहां गंभीर सवाल है कि आखिरी छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ कि उसे जान देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं दिखा? अन्य छात्राओं की माने को प्राचार्य और अन्य शिक्षक/डॉक्टर अक्सर छात्राओं को प्रताड़ित करते हैं, उनके साथ प्रदेश सूचक टिप्पणियां करते हैं।

मृतक छात्रा खुशबू के भाई जयप्रकाश की माने तो खुशबू ने सोमवार सुबह करीब 10 बजे अपने पति से फोन पर बात की थी। जिसके बाद वह 11 बजे क्लास के लिए गई, जहां शिक्षक ने उसे काफी फटकार लगाई और उसका फोन भी छीन लिया। क्लास खत्म होने के बाद खुशबू रोती हुई बाहर निकली और अपने कमरे में चली गई। जिसके बाद उसने 12:30 बजे अपने कमरे में लगे पंखे से लटककर आत्महत्या का प्रयास किया।

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छात्रा के परिजनों का आरोप हैं कि कॉलेज में उसके साथ अक्सर ज्यादती की जाती थी। वहीं अन्य छात्राओं ने भी प्राचार्य के हिटलर शाही रवैया से खफा हो कि उन्हें हटाने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही छात्राओं का आरोप हैं कि पुलिस-प्रशासन मामले को दबाने का प्रयास कर रही है।

ताजा जानकारी के अनुसार छात्राओं के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए नर्सिंग कॉलेज को एक सप्ताह के लिए बंद करने के साथ ही हॉस्टल भी खाली करा दिया गया है। वहीं इस पूरे मामले को लेकर प्रधान सचिव (स्वास्थ्य विभाग) संजय कुमार ने बताया कि, आईजीआईएमएस में छात्रा खुशबू कुमारी ने आत्महत्या की कोशिश की, जिसकी मौत इलाज के दौरान हुई है।

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इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए विभाग ने संयुक्त सचिव कौशल किशोर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह सिमित एक सप्ताह में मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। लेकिन छात्राओं का आरोप है कि इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हें हर कीमत पर न्याय मिलनी चाहिए।

छात्रों की मांग है कि प्राचार्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें संस्थान से हटाया जाना चाहिए। साथ ही मृतक परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और मृतका के पति को सरकारी नौकरी की भी मांग की जा रही है। बता दें कि यह मामला जमीनी स्तर पर भले ही अन्य मामलों के शोर-सराबे में गुम होता दिख रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर अब भी सुलग रहा है।

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