Breaking News
  • अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो आज करेंगे पीएम मोदी और एस. जयशंकर से मुलाकात
  • WC 2019 : इंग्लैंड को 64 रनों से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा ऑस्ट्रलिया
  • WC 2019 : बर्मिंघम के मैदान पर आज भिड़ेंगे न्यूजीलैंड और पाक
  • राज्यसभा में 26 जून को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देंगे पीएम मोदी
  • केंद्रीय गृहमंत्री शाह 26 जून को जाएंगे श्रीनगर, कल करेंगे बाबा बर्फानी के दर्शन

वसंत ऋतु का अग्रदूत है बसंत पंचमी, मां सरस्वती ने जन्म के साथ ही किया था चमत्कार

आज के दिन देश भर में मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आने का अग्रदूत माना गया है। कल से फीजा में नई बहार होगी। बसंत पंचमी के अवसर पर कई स्कूल-विद्यालयों में विद्या की देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई और पुजा-पाठ किया।

कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। बसंत पंचमी का त्योहार पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल समेत अन्य कई जगहों पर बेहद ही खास तरीके से मनाया जाता है। वसंत ऋतु को लेकर ऐसा कहा जाता है कि इस मैसम में फूलों पर बहार आ जाती है।

खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूं की बालियां खिलने लगतीं हैं, हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियां मंडराने लगतीं हैं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवे दिन बड़ा जश्न मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा होती है, जो वसंत पंचमी का त्यौहार है।

इसके साथ ही बता दें कि वसंत पंचमी को लेकर शास्त्रों और पुराणों में भी कई तरह की कथाओं का जिक्र किया गया है। एक कथा के अनुसार बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, सृष्टि की शुरुआत के साथ ही भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की, लेकिन वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि इसमें कुछ कमी रह गई है जिसके कारण हर तरफ मौन ही मौन है। जिसके बाद विष्णु से आज्ञा लेकर ब्रह्मा जी ने अपने कमण्डल से जल छिड़काव किया।  पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा।

इस मंदिर में बोलती है हनुमान जी की मूर्ति, सांसे भी चल रही है!

इसके बाद पेड़ों को बीच से अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। जो सुंदर चतुर्भुजी स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ वर के मुद्रा में थे, जबकि अन्य दोनों हाथों में पुस्तक और माला थे। देवी का स्वरूप देखते ही ब्रह्मा जी ने उनसे वीणा बजाने का आग्रह किया और जैसे ही देवी ने वीणा बजाया समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी की प्राप्त हुई।

अब मनुष्य बोलने लगे, जलधारा में कोलाहल हो गया, हवा में सरसराहट आई। इसके बाद ब्रह्मा ने देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा, जिन्हें मां बागीश्वरी, मां भगवती, मां शारदा, मां वीणावादनी और मां वाग्देवी समेत अन्य कई नामों से जाना जाता है। मां विद्या और बुद्धि की प्रदाता मानी गई हैं। मां संगीत की देवी है, जिसके स्वर में सरस्वती विराजे हो उसे कोई पराजित नहीं कर सकता।

प्रियंका का जादू चल गया, सर्वे ने उड़ाई भाजपा की हवाइयां

loading...