Breaking News
  • मंदी से निपटने के लिए सरकार ने किए बड़े ऐलान, ऑटो सेक्टर को होगा उत्थान
  • तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में यूएई की राजधानी आबू धाबी पहुंचे मोदी
  • देश भर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम, राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
  • 1st Test Day-2: भारत की पहली पारी 297 रनों पर सिमटी, रवींद्र जडेजा ने बनाए 58 रन

आखिर क्यों की जाती हैं कांवड़ यात्रा, एक नहीं कई प्रकार की हैं यात्रा

नोएडा : सावन माह एक ऐसा महिना जिसके आते ही चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नज़र आती है, इस मौसम में लोगों के मन मस्तिष्क में एक नये ऊर्जा का संचार होता है। लगातार चार महीने की तपिस के बाद बारिस की पहली बूंद जब पृथ्वी पर पड़ती है तो पूरे वातावरण में फैले मिट्टी की सुगंध से सभी प्राणियो को गर्मी से मुक्ति का संकेत मिल जाता है । बारिस में पड़ने वाली बूदों की छटा और इसी माह से हिंदू धर्म के त्योहारों की शुरुआत ।

आपको बता दें कि श्रावण मास में ही कावड़ यात्रा प्रारंभ होती हैं, जो पूरे महिने चलती है । भगवान भोले नाथ का समस्त शिवालयो में विधि-विधान से पूजा अर्चना प्रारंभ हो जाता है । बम-बम भोले और हर-हर गंगे के जयकारे से पूरा वातावरण गुंजायमान हो जाता है। लेकिन पहले आपको हम यह बताये कि कांवड़ यात्रा आखिर हैं क्या?

कांवड़ यात्रा में किसी पावन जगह से कंधे पर गंगा जल ले कर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने की प्रकिया को कांवड़ यात्रा कहते है । शिव को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ यात्रा को सबसे आसान मार्ग माना गया है । कहते है इसी महिने में भगवान शिव और भक्तो की दूरी कम हो जाती है ।

श्रावण मास में प्रारंभ होने वाली कावड़ यात्रा पूरे महिने चलती है। भगवा रंग के कपड़े पहने जब कांवड़ियां विभिन्न मार्गों से होकर गुजरते है तो ऐसा प्रतीत होता है मानो सूर्य देव स्वयं धरती पर आ कर उदयीमान हो रहे हैं ।

कावड़ यात्रा के प्रकार :-

सामान्य कावड़- सामान्य कांवड़ में, कांवड़िये कांवड़ यात्रा के दौरान जहां चाहे रुककर विश्राम कर सकते है । इनको विश्राम करने के लिए मार्ग पंडाल लगे होते है ।

डाक कांवड़- डाक कावड़ में कावड़िये यात्रा की शुरुआत शिव के जलाभिषेक तक बिना रुके चलते रहते है, इनके लिए मंदिरो में विशेष तरह के इंतजाम किये जाते है । जब वे आते है तो लोगो द्वारा इनके लिए रास्ता बनाया जाता है ताकि शिवलिंग तक बिने रुके आसानी से जलाभिषेक कर सके ।

खड़ी कांवड़-  कुछ भक्त खड़ी कांवड़ लेकर चलते है, यात्रा के दौरान इनकी मदद के लिए कोई न कोई सहयोगी इनके साथ चलता है । जब वे विश्राम करते है तो सहयोगी अपने कंधे पर उनकी कांवड़ लेकर कांवड़ को चलाने के अंदाज में हिलाते रहता है ।

दांडी कांवड़ – दांड़ी कावड़ में भक्त नदी के तट से लेकर शिवधाम तक की यात्रा अपने आप को दंड दे कर पूरी करता है । कावड़-पथ की दूरी को अपने शरीर की लंबाई से लेटकर नापते हुए यात्रा पूरी करते है। यह बेहद मुश्किल होता है और इस यात्रा में एक महिने तक का समय लग जाता है ।

कांवड़ यात्रा के नियम :-

कांवड़ यात्रा कई तरीके से ले जाया जा सकता है । यात्रा के दौरान किसी प्रकार का नशा, मदिरा, मांस और तामसिक भोजन जैसे प्याज, लेहसुन वर्जित माना गया है । कांवड़ को बिना स्नान किये हाथ नही लगाना चाहिए, चमड़ा को स्पर्श नही करना चाहिए, वाहन का उपयोग नही करना चाहिए, चारपाई का उपयोग नही करना चाहिए, वृक्ष के नीचे कांवड़ नही रखना चाहिए, कांवड़ को अपने सिर के से लेकर जाना भी वर्जित माना गया है ।

कावड़ यात्रा करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल की प्राप्ति होती है । शास्त्रों में वर्णित हैं कि सावन में शिव भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ बोल बम का नारा लगाते हुए पैदल यात्रा करते है। इस यात्रा से उनके सभी पापों का अंत हो जाता है। वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं मृत्यु के बाद शिव लोक की प्राप्ति होती है।

loading...