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भारत में नहीं पाकिस्तान से हुई होली की शुरुआत, लेकिन पाकिस्तानियों ने तोड़ दिया मंदिर!

नई दिल्ली: हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के लिए सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक होली का त्योहार इस साल 21 फरवरी को मनाया जाएगा, जबकि इससे पहले 20 फरवरी की शाम होलिका दहन किया जाएगा। लेकिन इससे पहले आज आप को होली से जुड़ी एक ऐसी बात बता रहे हैं, जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे।

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होली को लेकर पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान नरसिंह ने भक्त प्रल्हाद की जान बचाई थी। भगवान नरसिंह विष्णु भगवान के अवतार बताये जाते हैं, जिन्हें प्रल्हाद पूजा करता थे। लेकिन उसके पिता हिरण्यकश्यप को यह पसंद नहीं था। जिसके कारण वह अपने बेटे को प्रताड़ित करता था।

वहीं एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रताड़ना की सारी हदे पार कर दी, जिसके बाद भगवान नरसिंह खंभे से प्रकट हुए और भक्त प्रल्हाद की जान बचाई। ये बातें शायद आप भी जानते होंगे, लेकिन क्या आप यह भी जानते हैं कि भक्त प्रल्हाद ने भगवान नरसिंह के सम्मान में एक मंदिर का निर्माण कराया था और उसी मंदिर से होली की शुरुआत हुई थी।

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हालांकि भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे के बाद यह मंदिर पाकिस्तान के हिस्से में चला गया है। यह मंदिर पाकिस्तान के मुल्तान में है, जहां दो दिनों तक होलिका दहन उत्सव की तहत मनाया जाता था, जबकि होली पूरे नौ दिनों तक मनाई जाती थी।

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बताया जाता है कि पाकिस्तान के मुल्तान स्थित यह मंदिर भगवान नरसिंह का पहला मंदिर है, लेकिन पाकिस्तान में इस पर हमला हो चुका है। स्पीकिंग ट्री की माने तो जब भारत में बाबरी मस्जिद को गिराया गया तब पाकिस्तान में कई हिंदू मंदिरों को ढाह दिया गया था, जिसमें एक प्रल्हादपुरी मंदिर भी था।

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जानकारी के अनुसार प्रल्हादपुरी मंदिर में रखी गई भगवान नरसिंहा की मूर्ति अब हरिद्वार में है, जिसे बाबा नारायण दास बत्रा भारत लेकर आए। बता दें कि वयोवृद्ध संत नारायण दास ने भारत में कई स्कूलों और कॉलेजों का निर्माण कराया। समाज के प्रति उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2018 में सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से भी सम्मानित किया है।

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