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कोरोना संकट काल में संकट मोचन हनुमान से जुड़ा बड़ा सच


रिपोर्ट: सौरभ सिंह

नई दिल्ली : कोरोना इस समय भारत के लिए भयावह संकट बना हुआ है।आए दिन कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया है। आज शनिवार 23 मई को लॉकडाउन का 60वां दिन है। लॉकडाउन के कि चलते जरूरी सुविधाओं को छोड़कर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे सब बंद। ऐसे में सभी धर्म के लोग  अपने घर में ही पूजा पाठ कर रहे हैं।

हिंदू धर्म में मान्यता है कि संकट की घड़ी में भगवान हनुमान सभी की सहायता करते हैं। तभी तो भगवान हनुमान का नाम संकट मोचन भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं संकट मोचन हनुमान से जुड़ा एक सच, आप सभी जानते हैं कि भगवान हनुमान ने कभी विवाह ना करने की शपथ ली थी, जिस कारण वे आजीवन अविवाहित रहें और जिस कारण उन्हें उनके भक्तजन ब्रह्माचारी मानते है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि हनुमान जी एक पत्नी भी है, जिनके साथ भारत के एक प्रशिद्ध मंदिर में उनकी पूजा भी होती है। अब आप यह सोच रहें होंगे कि जब हनुमान जी की पत्नी है तो वे ब्रह्मचारी कैसे हुए, तो आपको इस रहस्य को जानने के लिए इस कहानी को जानना होगा, जो प्राचीन ग्रंथ पाराशर संहिता से ली गई है।

ग्रंथ के अनुसार, हनुमान जी के गुरू भगवान सूर्य देव है, जो आप सभी जानते है। अपनी शिक्षा और दीक्षा को लेकर हनुमानजी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। सूर्य देव के पास 9 दिव्य विद्याएं थीं, जिन्हें हनुमान जी प्राप्त करना चाहते थे। भगवान सूर्य भी उन्हें अपना शिष्य बनाकर अत्यंत खुश थे, लेकिन उनके सामने एक समस्या थी कि उनके पास जो 9 विद्याएं थी, वे उनमें से मात्र 5 ही विद्याएं हनुमान जी को दे सकते थे। क्योंकि उस समय बजरंगबली शादीशुदा नहीं थे, लेकिन शेष 4 विद्या के लिए उनका शादी शुदा होना अत्यंत आवश्यक था।

इसलिए भगवान सूर्य ने हनुमान जी को 5 विद्याएं दी। जिसे देखकर बजरंगबली ने शेष 4 विद्याएं भी देने की बात कहीं। जिसे लेकर भगवान सूर्य देव ने उन्हें इन 4 विद्याओं की पात्रता को बताया, जिसे जानकर हनुमान बेहद चिंतिंत हुए। जिनके चिंता का निवारण भगवान सूर्य देव की पुत्री सुर्वचला पर आकर समाप्त हुआ।

सूर्य देव ने हनुमानजी से कहा कि सुवर्चला परम तपस्वी और तेजस्वी है और इसका तेज तुम ही सहन कर सकते हो। सुवर्चला से विवाह के बाद तुम इस योग्य हो जाओगे कि शेष 4 दिव्य विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर सको। सूर्य देव ने यह भी बताया कि सुवर्चला से विवाह के बाद भी तुम सदैव बाल ब्रह्मचारी ही रहोगे, क्योंकि विवाह के बाद सुवर्चला पुन: तपस्या में लीन हो जाएगी। 

यह सब बातें जानने के बाद हनुमानजी और सुवर्चला का विवाह सूर्य देव ने करवा दिया। और विवाह के बाद सुवर्चला तपस्या में लीन हो गईं और हनुमानजी ने अपने गुरु सूर्य देव से शेष 4 विद्याओं का ज्ञान भी प्राप्त कर लिया। इस प्रकार विवाह के बाद भी हनुमानजी सदा के लिए ब्रह्मचारी बने हुए हैं। आपको बता दें कि हनुमानजी और उनकी पत्नी सुर्वचना का मंदिर तेलांगाना के खम्मम जिला में है, जो हैदराबाद से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अत: यहां जाने के लिए आपको हैदराबाद से आवागमन के उचित साधन मिल सकते हैं। और जहां रही हैदराबाद जाने की बात तो, हैदराबाद पहुंचने के लिए आपको देश के सभी बड़े शहरों से बस, ट्रेन और हवाई जहाज की सुविधा आसानी से मिल जाती है।

मान्यता: अगर हम बात करें इस मंदिर के मान्यता की तो, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त भगवान हनुमान और उनकी पत्नी के दर्शन करता है, उनके वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और पति-पत्नी के बीच प्यार बना रहता है। अतः आप इस मंदिर का दर्शन अवश्य करें।

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