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आखिर कौन फैला रहा है रमजान को लेकर ये झूठी बातें, जाने क्या है सच्चाई

नई दिल्ली: इन दिनों रमजान का पाक महीना चल रहा है, जिसमें आम तौर पर मुसलमान रोजा रखते हैं। रमाजान का पका महीना 30 दिनों तक चलता है, ऐसे में इस साल यह महीना 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक है, जिसमें पांच जुमे है। पहला जुमा रमजान के शुरु होने के साथ ही 18 मई को निकल चुका है, जबकि आखिरी जुमा    15 जून को है, जिसे अलविदा जुमा के नाम से भी जाना जाता है। इस आखिरी जुमे के अगले दिन मुसलमान समाज के लोग भाईचारे का त्योहार ईद मनाते हैं।

आपको बता दें रमजान के इस पाक महीने में आपको इससे जुड़ी कुछ चौकाने वाली बाते बता रहे हैं, जिसे आम तौर पर कई लोग सच मान लेते हैं, जबकि जानकारा के अनुसार इसे गलत बताया गया है। इससे पहले की आपको उन गलत बातों के बारे में बताए ये जानिए कि रमजान महीने में रोजा खत्म होने के बाद ईद मनाया जाता है, जिसे ईद-उल-फितर और मीठी ईद के नाम से भी जानते हैं। बताया जाता है कि ईद के दिन नमाज से पहले गरीबों में फितरा बांटा जाता है, जिसके कारण इस ईद को ईद-उल-फित्र या ईद-उल-फितर के नाम से जानते है।

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गौर हो कि अक्स ऐसा कहा जाता है कि रमजान के महीने में रोज रखने वालों के लिए ब्रस करमे की मनाही होती है। लेकिन ये बता गलत है, क्योंकि असल बात ये हैं कि रोजा रखने वाले और नमाज पढ़ने वालों के लिए इस्लाम में 'सिवाक' नाम का एक नियम है, जिसके तहत दांतों को साफ करना जरूरी माना गया है, ऐसे में अगर कोई ऐसा किए बिना नमाज अदा करता है तो उसकी नमाज पूरी नहीं मानी जाती।

इसके साथ ही ऐसा भी कहा जाता है कि रमजान के महीने में हर मुसलमान के लिए रोजा रखना जरूरी होता है, जबकि असल में ऐसा नहीं है क्योंकि अगर इस दौरान कोई मुसलमान बीमार है, या कोई महिला गर्भवती है, या फिर किसी और कारण से वे रोजा नहीं रखना चाहते तो नहीं भी रख सकते हैं, क्योंकि इस्लाम में ऐसा कहीं नही दिखता जहां यह लिखा हो कि रमजान के महीने में हर मुसलमान के लिए रोजा रखना जरूरी ही है।

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बता दें कि जो लोग गैर-मुस्लिम हैं या फिर जिन्हें इस्लाम की पूरी जानकारी नहीं हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि रोजे के दौराम अपना थूक भी अंदर नहीं लिया जाता, ऐसा करने से उनका रोजा टूट जाता है, जबकि यह बात गलत है। दरअसल लोगों को ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि रोज़े के दौरान पानी भी नहीं पीने की भी मनाही है।

लोगों ऐसा भी सोचते हैं कि जो लोग रमजान में रोजा रखते हैं उनके सामने किसी दूसरे को भी नहीं खाना चाहिए। जबकि ये बात भी गलत है, क्योंकि इस पाक महीने में रोजा रखने वाले मुसलमान के अंदर इतनी ताकत होती है कि वह अपने आप पर नियंत्रण रखे सके। ऐसे में अगर कोई इनके सामने खाना भी खाता है तो इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे रोजा में होते हैं।

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इसके साथ ही अपको बता दें कि अगर रमजान में रोजा रखने वाला मुसलमाल गलती से कुछ खा लेता है तो उसका रोजा टूट नहीं जाता है, लेकिन अगर कोई जान-बुझ कर खता है तो वाकई उनका रोजा टूट जाता है। इसके अलावा भी कई अन्य तरह ही बाते हैं जिसे लोग जानकारी के आभाव में सही मान लेते हैं, जबकि ऐसा असल में होता नहीं है।

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