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पितृपक्ष में ऐसे करें पितरों का पूजन, पूरे होंगे हर काम

नई दिल्ली: पितृपक्ष के 15 दिनों में पिंडदान, तर्पण और मार्जन के जरिए पितरों को प्रसन्न किया जाता है। यही नहीं पितृदोष से मुक्ति के लिए इन दिनों किया गया पूजन पाठ और श्राद्ध कर्म बहुत लाभकारी होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद महीने के पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक पितृपक्ष रहता है। इस बार पितृपक्ष 24-25 सितंबर से शुरू होकर 8 (पितृ अमावस्या) अक्टूबर तक रहेगा।

कब, कैसे करें श्राद्ध

जिस व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि को हुई होती है, उसी तिथि में उसका श्राद्ध किया जाता है। यहां महीने से कोई लेना देना नहीं है। यही नहीं जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। साथ ही किसी की अकाल मृत्यु यानी गिरने, कम उम्र, या हत्या ऐसे में उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि को ही किया जाता है।

अफवाहों से बचें

पितृपक्ष को लेकर तमाम तरह की अफवाह और भ्रम की स्थिति रहती है। कई लोग पितृपक्ष के दौरान घर में पूजन पाठ बंद कर देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए।

मान्यता है कि पितृपक्ष में कोई नया काम नहीं किया जाता है। इन दिनों बस मांगलिक कार्य यानी शादी, विवाह, गृहप्रवेश, किसी नए संस्थान की ओपनिंग नहीं की जाती है। वहीं, रोजमर्रा की जरूरी चीजों की खरीददारी, काम के लिए कोई बंदिश नहीं होती।

पूजन कैसे करें

पितृपक्ष के दिनों में हर रोज स्नान करने के बाद पितरों को जल, अर्घ्य दें। इस दौरान कुशा और तिल, जौ का होना जरूरी होता है। साथ ही जो श्राद्ध तिथि हो उस दिन पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करें। घर में उस दिन उस व्यक्ति का पसंदीदा भोजन बनवाएं। पहले गाय, कौवे-पक्षी और कुत्ते को भोजन निकाल दें।

सारे व्यंजन में से थोड़ा-थोड़ा निकालकर एक पात्र में लेकर उसे किसी सड़क, चौराहे पर रख दें। इसके बाद घर आकर ब्राह्मण को भोजन कराएं। और अपने पितृदेव, भगवान विष्णु को प्रणाम करें।

आचार्य कमल नयन तिवारी

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