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पानी से जलता है इस मंदिर का चमत्कारी दीपक, जानिए क्यों होता है ऐसा!

वैसे तो भगवान को किसी ने नहीं देखा है लेकिन फिर भी लोगों के मन में भगवान के प्रति ऐसी आस्था है, जिससे उन्हें ऐसा लगता है कि भगवान हर जगह मौजूद हैं। खास तौर पर अगर भारत की बात करें तो यहां भगवान में विश्वास रखने वाले भक्तों की संख्या शायद दुनिया भर में सबसे अधिक है।

वहीं भारत में कई ऐसी चमत्कारी जगहें भी हैं जिसके बारे में जानने के बाद हर कोई सोच-विचार करने पर मजबूर हो सकता हैं। आज यहां आपको एक ऐसे ही चमत्कार के बारे में बता रहे हैं।

इससे पहले एक सवाल है कि क्या आपने कभी पानी से दीपक जलाया है या जलता हुआ देखा है?

अगर आपने पहले कभी नहीं देखा हैं तो यह आपके लिए चमत्कार हो सकता है। क्योंकि मध्य प्रदेश के एक गांव में एक ऐसा मंदिर है जहां दीपक घी या तेल की मदद से नहीं बल्कि पानी से जलता है!

मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से बताया जाता है कि यह मंदिर मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में कालीसिंध नदी के किनारे गाड़िया गांव के पास है, जिसे गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से ख्याति प्राप्त है।

बताया जा रहा है कि इस मंदिर में माता के लिए जो दीपक जलये जाते हैं उसमें घी या तेल नहीं बल्कि पानी डाला जाता है। आपको यह जानकारी के हैरानी होगी की जिस पानी का इस्तेमाल आग बुझाने के लिए करते हैं वो मात के दरबार में दीपक जालाने का काम करता है।

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बताया जाता है कि मंदिर के पुजारी के सपने में एक दिन माता रानी आई और कहा कि मंदिर का दीपक घी, तेल, या मोम से न जलाकर नदी के पानी से जलाओं। इसके बाज जब पुजारी ने दीपक मे नदी का पानी डाल कर माचिस को उसके करीब ले गए तो वो दीपक उसी तरह से जलने लगा जैसा घी या तेल की मदद से जलता है। ऐसा देखर पुजारी पूरी तरह घबरा गए, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी।

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हालांकि कुछ समय बाद जब पुराजी ने लोगों को ये बात बताई तो लोगों ने यकीन करने से माना कर दिया। दावा किया जाता है कि इसके बाद पुजारी ने लोगों को ऐसा करके दिखाया, जिसके बाद से ही लोग इसे माता का चमत्कार मानते हैं।

वहीं दूसरी तरफ कहा जाता है कि जब इस मंदिर के दीपक में पानी डाला जाता है तो वह चिपचिपा तरल पदार्थ में बदल जाता है और दीपक जल उठता है।

बताया जाता है कि मंदिर का दीपक सिर्फ बरसात के समय नहीं जलता है, अन्य सभी मौसम में दीपक जलता ही रहता है। गांव वालों के अनुसार, मंदिर नदी के किनारे स्थित है और बरसात के मैसम में नदी पानी से भरा होता है, जिसके कारण मंदिर भी पानी में डूबा रहता है।

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