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OMG: राम-रावण की ऐसी तुलना यूपी में ला सकता है महाप्रलय!

राम और रावण को लेकर पहले भी आपने कई तरह की कहानी और कथाएं सुने होंगे। जिनमें पराक्रमी राजा राम को भगवान का दर्जा दिया गया जबकि रावण को बुराई का प्रतिक माना जाता है, जिसके लिए हर साल दशहरे के अवसर पर बुराई का अंत यानी रावण का पुतला दहन किया जाता है। हालांकि हालांकि हाल के दिनों में देश में बदलाव की आंधी चल रही है, जिसका असर लगभग सभी क्षेत्रों में दिख रहा है।

वहीं अब बदलाव की आंधी में ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले दिनों में राम और रावण की कथा भी बदल जाए। दरअसल, उत्तर प्रदेष में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ने पंडित सतेन्द्र शर्मा ने कुछ ऐसा बयान दिया है, जिसकी चर्चा तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण समाज के लोगों को रावण दहन का दुख हैं।

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शर्मा ने कहा कि हर धर्म में संस्कार केवल एक बार होता हैं, बार-बार नही होता और रावण इस सृष्टि का सबसे प्रकांड विद्वान थे, जिसने केवल तेरह साल की उम्र में रावण सहिता लिख दी थी। जिन्हें भगवान शंकर के परम भक्त मावा जाता है, ऐसे व्यक्ति का हर वर्ष पुतला दहन होना ठीक नहीं है। इससे ब्राह्मण समुदाय को टिस पहुंचती हैं, उन्हें बुराई का प्रतीक बना दिया, जबकि रावण ने कोई भी ऐसा घिनोना काम नही किया।

उन्होंने कहा कि अगर रावण ने सीता जी का हरण किया तो उन्हें अशोक वाटिका में रखा गया और उन्होंने नारी के सम्मान का पूरा ध्यान रखा। लिहाजा ब्राह्मण महासभा हर वर्ष होने वाले पुतला दहन का विरोध करने जा रही हैं, यह पुतला दहन परंपरा बिल्कुल गलत हैं और ब्राह्मण सेना भी इसका विरोध करेगी।

वहीं उन्होंने राम को लेकर कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एक राजा थे, उन्हें भगवान की उपाधि दी गई ठीक हैं उनका महिमा मंडन किया गया, लेकिन ये ठीक नही की रावण को बुराई का प्रतीक बना दिया गया, जबकि उन्होंने कहि भी अनीति का काम नही किया और जबकि रामचंद्रजी ने बहुत सारे ऐसे काम किये हैं।

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राम ने भाई को भाई को लड़वाया, छुप कर बाली को मारा और ब्राह्मण महासभा के अनुसार रामचंद्र जी का कही भी कोई मंदिर अस्तित्व में नही हैं,  उन्ही के घर अयोध्या में बनने को तैयार हैं जिसको लेकर बड़ा विवाद चल रहा हैं जबकि हिन्दू समाज के भगवानों के हजारों मंदिर हैं और अगर राजाओ के मंदिर बनने लगे तो हर शहर और हर प्रदेश में मन्दिरो की बाढ़ आ जायेगी और मर्यादा पुरुषोत्तम राम सिर्फ एक राजा थे और शक्तिशाली राजा थे।

उन्होंने अपने समय में अश्वमेघ यग का घोड़ा घुमवाया और उन्ही के पुत्रों ने पकड़ा। और तो और अग्नि परीक्षा के बाद भी उन्होंने सीता जी को वनवास दिया, जो नारी जाति का अपमान हैं। इसके साथ ही उन्होंने रावण को ब्राह्मणों के ईस्ट देव बताते हुए कहा कि उन्हें बुराई का प्रतीक बनाकर हर वर्ष दशहरे पर लगने वाले मेले से ब्राह्मणों की तौहीन की जाती हैं, वे उससे आहत हैं, उनका समाज, और हर साल पुतला दहन सरासर गलत हैं इसे उनका समाज एक जघन्य अपराध मानता हैं।

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